लिखने का शौक बचपन से था. घर में हमेशा से पढ़ने लिखने का माहौल था. बाबा प्रख्यात लेखक थे. पापा भी हिंदी के प्रोफेसर थे. माँ हिंदी की टीचर थी. घर में बात चीत भी हिंदी के मानक लेखन पर होती थी. मैंने जब लिखना शुरू किया तो भाषा क्या होनी चाहिए इसपर मन में एक कौतुहल था. स्कूल जो इंग्लिश मध्यम था.
जब अपना काम शुरू किया तो लगा की अंग्रेजी ही एक अच्छा माध्यम है तो अंग्रेजी में लिखा. कुछ छपा भी. बड़ी ख़ुशी हुई थी. आज जब किसी ने कहा की आप भी लिखिए, एक अपना ब्लॉग बनाइये तो सोचा शुरुआत मैं हिंदी से ही करुँगी.
बस मन में जो आया वह लिखूंगी.. अपनी कलम को आवाज़ दूंगी.
जब अपना काम शुरू किया तो लगा की अंग्रेजी ही एक अच्छा माध्यम है तो अंग्रेजी में लिखा. कुछ छपा भी. बड़ी ख़ुशी हुई थी. आज जब किसी ने कहा की आप भी लिखिए, एक अपना ब्लॉग बनाइये तो सोचा शुरुआत मैं हिंदी से ही करुँगी.
बस मन में जो आया वह लिखूंगी.. अपनी कलम को आवाज़ दूंगी.
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