Saturday, June 11, 2016

प्यार

प्यार हमेशा अधूरा होता है।  कभी पूरा नहीं होता।  कभी  काफी नहीं पड़ता। देने वाला देते देते थक जाये लेकिन लेने वाला कभी नहीं थकेगा।  और शायद इसलिए प्यार इतनी मुश्किल से मिलता है।  

किसी ने पसंद और प्यार की परिभाषा बहुत उम्दा तरीके से समझायी। पसंद वह जो आपके दिल को छू जाये और प्यार वह जो आपका हिस्सा बन जाये।  कल जब मेरे बेटे ने मुझसे कहा की मुझे कोई प्यार नहीं  करता, तो मैंने उसको उसके  पैदाईश की बात बताई जब रात में उसके मम्मा- बाबा , नाना- नानी , काकू (चाचा), गोगी (मौसी) सब उससे मिलने आये। बस इतनी सी बात ने उसकी सोच बदल दी।  या कम से कम शुरआत कर दी।

बच्चे आसानी से मान जाते है।  या शायद उनके पास इतना समय ही नहीं होता की वह ज्यादा सोचेंगे।  हाँ यह ज़रूर है की अक्सर हम बड़े भी इसी जद्दोजहत में  है  की दुसरे हमें  पसंद कैसे करें या प्यार कैसे  करे।  और जब दूसरे हमें  हमारे  हिसाब से नहीं देखते तो हमें दुःख है।  हम वह सारे वादे कसमे गिनने लगते है तो शायद हमने कभी किये थे या कहे थे।

प्यार को बिना किसी कसौटी पर नापे अगर हम दे सके तो उससे पाक भावना कोई नहीं होगी।
 




 

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