Wednesday, May 13, 2020

Lockdown Diaries Entry 2

May 13, 2020

मम्मी पापा की ५२वी सालगिरह. कल सोचा था कुछ लिखूंगी की फेसबुक पर फिर सो गयी।  सुबह दीदी का पोस्ट देखा।  काफी मार्मिक था।  उसके आगे कहने के लिए कुछ था ही नहीं।  लेकिन मन नहीं मानता।  ऊपर से दीदी ने पोस्तो की याद दिला दी।  शादी के बाद ससुराल में कोई नहीं  खाता , पर न जाने क्या सोच कर कुछ दिन पहले मैंने मनीष को लाने के बोल ही दिया था।  तब दिमाग में भी नहीं आया था,, की मम्मी पापा की सालगिरह पर बनाउंगी। 

lockdown ने वाकई रिश्तों की अहमियत समझा दी है, इसलिए शायद पहली बार मुझे यह भी समझ में आ रहा है की मेरे मम्मी पापा सिर्फ मेरे लिए खास नहीं थे।  उनके अंतिम कुछ साल शायद गए ऐसे ही थे, लेकिन उनकी क्या अहमियत थी, दूसरों की ज़िन्दगी में; यह बात मुझे अब पता चल रही है।  काफी गुस्सा थे मेरे अंदर काफि सालों तक, अभी भी है शायद; लेकिन एक बात तो समझ में आ गयी।

जो जगह मेरे मम्मी पापा लोगो के दिलो में अपने लिए बना कर गए थे; वह सबके बस की बात नहीं।  मैं तो सिर्फ फक्र महसूस करती हूँ की मैं उनकी बेटी हूँ और आशा करती हूँ की शायद उन जैसे नहीं तो उनकी परछाई बन सकू।




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